पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने आयोग की जल्दबाजी पर उठाए सवाल
भोपाल। केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा क्षेत्र में होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस सिलसिले में चुनाव आयोग ने दतिया कलेक्टर को पत्र भेजकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपैट मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
आयोग का पत्र मिलते ही जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। प्रशासन ने 19 मई की तारीख तय करते हुए सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को एफएलसी प्रक्रिया में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। इसके साथ ही, दतिया नगर पालिका क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जो 25 मई तक चलेगी। चुनाव आयोग ने दतिया उपचुनाव की मुस्तैदी को परखने के लिए जिला प्रशासन से कुल 6 बिंदुओं पर एफएलसी सुपरवाइजर की नियुक्ति, ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रॉन्ग रूम का निर्माण और उसकी स्थिति, कंट्रोल यूनिट से जुड़ा तकनीकी प्रबंधन, जिला निर्वाचन अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट और कानून व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानक से जुड़े जानकारी मांगी है।
मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ी
प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार दतिया विधानसभा क्षेत्र में मतदान केंद्रों की संख्या 257 से बढ़ाकर 291 कर दी गई है। सुचारू मतदान के लिए करीब 200 प्रतिशत अतिरिक्त मशीनों की जांच की जाएगी, जिसमें लगभग 600 बैलेट यूनिट, 600 कंट्रोल यूनिट और 600 वीवीपैट मशीनें शामिल हैं। वहीं पूरी एफएलसी प्रक्रिया की निगरानी के लिए डिप्टी कलेक्टर विजेंद्र यादव को सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है। आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा में कोई चूक नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती, वेबकास्टिंग के जरिए निगरानी और दैनिक रिपोर्टिंग के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट में सुनवाई से पहले तैयारी क्यों: भारती
इस प्रशासनिक हलचल के बीच सूबे की राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ गई है। दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने चुनाव आयोग की इस सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारती का कहना है कि एक विशेष व्यक्ति को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए आयोग इतनी जल्दबाजी दिखा रहा है। जब मामला अभी देश की उच्च अदालत में विचाराधीन है, तो अंतिम निर्णय आने से पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का क्या औचित्य है?
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि वर्ष 1998 के एक बैंक घोटाले से जुड़े मामले में राजेंद्र भारती को अदालत ने तीन साल की सजा सुनाई थी। नियमतः सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। राजेंद्र भारती ने इस सजा और अयोग्यता के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिस पर आगामी 26 मई को महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। भारती का तर्क है कि आयोग को इस सुनवाई के नतीजों का इंतजार करना चाहिए था।