TVK के पास सरकार गठन के क्या विकल्प: कौन साथ देने को तैयार, कौन अभी कर रहा विचार; किससे जुड़ रहे विजय के तार?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Wed, 06 May 2026 03:59 PM IST

विजय के पास तमिलनाडु में सरकार बनाने के क्या विकल्प नजर आ रहे हैं? अब तक किन-किन पार्टियों और गठबंधनों में टूट के संकेत साफ दिख रहे हैं? विजय ने पहले कब-किस पार्टी और गठबंधन को लेकर क्या कहा है? आइये जानते हैं...

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तमिलनाडु में सरकार बनाने की जद्दोजहद जारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तमिलनाडु में चुनाव नतीजे आने के बाद से ही राज्य में सियासी सरगर्मियां जारी हैं। राज्य में किसी भी एक दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है। हालांकि, सिनेमा की दुनिया को छोड़ राजनीति की दुनिया में आए सुपरस्टार विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनकर उभरी है। इतना ही नहीं, अपनी इस जीत में टीवीके ने तमिल राजनीति की दो पुरानी पार्टियों- सत्तासीन द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) और मुख्य विपक्षी दल रहे अन्नाद्रमुक को जबरदस्त पटखनी दी है। 

हालांकि, चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद सरकार बनाने के लिए विजय को कुछ विधायकों को साथ लाने की जरूरत है। मौजूदा समय में तमिलनाडु की राजनीति को देखें तो राज्य में निर्दलीय विधायक हैं ही नहीं। यानी सभी सीटें या तो द्रमुक गठबंधन या अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को जीत मिली है। इस लिहाज से देखा जाए तो विजय को सरकार बनाने के लिए इनमें से किसी एक या दोनों गठबंधनों को तोड़ना ही होगा, ताकि सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन हासिल कर पाएं।

विजय के पास तमिलनाडु में सरकार बनाने के क्या विकल्प?

तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में विजय की टीवीके 234 सीटों वाली विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, लेकिन वह 118 सीटों के बहुमत के आंकड़े से 10-11 सीटें पीछे है। इसकी वजह यह है कि विजय खुद दो सीटों से चुनाव जीते थे, जिसके कारण उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इससे टीवीके की प्रभावी संख्या 107 हो जाएगी। चूंकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 10 मई 2026 को खत्म हो रहा है, इसलिए सबसे बड़ी पार्टी होने की वजह से उन्हें सरकार बनाने का निमंत्रण मिल जाएगा। यानी उन्हें जल्द ही सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्याबल जुटाने के साथ बहुमत पेश करना होगा। इसके लिए कुछ परिदृश्य बनते भी दिख रहे हैं। 
परिदृश्य-1: कांग्रेस और अन्य छोटे क्षेत्रीय दलों का समर्थन मिले
विजय के लिए सबसे सीधा रास्ता छोटे दलों का समर्थन हासिल करना है। मौजूदा समय में कांग्रेस के पास पांच विधायक हैं। इससे विजय की पार्टी बहुमत के करीब तो पहुंच जाएगी, लेकिन फिर भी सरकार बनाने के लिए उसे कुछ और साथियों की जरूरत होगी। 
इसके लिए विजय कुछ और छोटे दलों से बातचीत कर सकते हैं। इनमें पीएमके (4 सीट), वामदलों यानी भाकपा (2 सीट) और माकपा (2 सीट), वीसीके (2 सीट), आईयूएमएल (2 सीट) और डीएमडीके (1 सीट) जैसे क्षेत्रीय दलों से संपर्क साधा जा सकता है। मौजूदा समय में यह सभी दल या तो द्रमुक और या फिर अन्नाद्रमुक गठबंधन का हिस्सा हैं।
परिदृश्य-2: द्रमुक-अन्नाद्रमुक का बाहर से समर्थन या गठबंधन
टीवीके को अन्नाद्रमुक का साथ भी मिल सकता है, जिसके पास 47 सीटें हैं और यह पार्टी अब मुख्य विपक्षी दल का दर्जा भी खोकर तीसरे स्थान पर फिसल चुका है। ऐसे में अपने मुख्य विरोधी द्रविड़ दल- द्रमुक को सत्ता से बाहर रखने के लिए अन्नाद्रमुक बाहर से समर्थन देने पर विचार कर सकती है।
कुछ यही काम द्रमुक की तरफ से भी किया जा सकता है। लेकिन चूंकि विजय की पार्टी ने द्रमुक से ही सत्ता छीनी है, इसलिए द्रमुक का तमिलनाडु की राजनीति में विजय के पीछे बैक सीट पकड़ने की संभावना काफी कम है। मौजूदा समय में दूसरे नंबर की पार्टी द्रमुक इसके बजाय विजय के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल बने रहने पर विचार कर सकती है। 
परिदृश्य-3: अल्पमत सरकार और फ्लोर टेस्ट में गैरमौजूदगी
विजय एक अल्पमत सरकार भी बना सकते हैं जो सशर्त या मुद्दे-आधारित समर्थन पर निर्भर हो। इस परिस्थिति के तहत विधानसभा में बहुमत साबित करने (फ्लोर टेस्ट) के दौरान सदन में उपस्थित विधायकों के आधार पर ही गिनती होती है। 

अगर फ्लोर टेस्ट के दौरान विपक्षी दलों के कुछ विधायक अनुपस्थित हो जाते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा कम हो जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर 21 विधायक वोटिंग से दूर रहते हैं, तो बहुमत का आंकड़ा गिरकर 106 हो जाएगा, जिसे टीवीके अकेले ही साबित कर लेगी।

 

अब तक किन-किन पार्टियों और गठबंधनों में टूट के संकेत साफ दिख रहे हैं?

1. कांग्रेस

कांग्रेस, जिसके पास तमिलनाडु में पांच सीटें हैं, ने टीवीके को समर्थन देने की दिशा में सबसे स्पष्ट और सकारात्मक इशारा किया है।

क्या कहा है: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पुष्टि की है कि विजय ने उनसे समर्थन मांगा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि तमिलनाडु का जनादेश एक धर्मनिरपेक्ष सरकार के लिए है जो संविधान की रक्षा के लिए दृढ़ हो। कांग्रेस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भाजपा और उसके प्रतिनिधि किसी भी तरह से तमिलनाडु की सरकार न चलाएं। 

शर्तें: तमिलनाडु कांग्रेस ने टीवीके को सशर्त समर्थन देने का प्रस्ताव पारित किया है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कांग्रेस नई सरकार में दो कैबिनेट मंत्री पद और कुछ सरकारी बोर्डों की अध्यक्षता मांग रही है। इसके साथ ही यह शर्त भी रखी गई है कि टीवीके सरकार बनाने के लिए भाजपा या उसके सहयोगियों का समर्थन नहीं लेगी। यानी एनडीए गठबंधन में शामिल पार्टियों को टीवीके दूर ही रखेगी।

2. अन्नाद्रमुक

47 सीटों वाली अन्नाद्रमुक की ओर से भी टीवीके को समर्थन देने को लेकर कुछ संकेत मिले हैं।

क्या कहा है: पार्टी प्रवक्ता कोवई सत्यन ने दोनों खेमों के बीच बातचीत की खबरों की पुष्टि करते हुए कहा, "गेंद अब विजय के पाले में है। अगर उन्हें अपने सपने को हकीकत में बदलना है, तो पहल विजय की तरफ से ही होनी चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि इस पर अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान लेगा।

एआईएडीएमके नेता सीवी शनमुगम ने भी कहा है कि गठबंधन पर पार्टी को फैसला लेना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अन्नाद्रमुक के अंदर का एक गुट विजय को समर्थन देने के पक्ष में है, हालांकि पार्टी के कुछ नेताओं ने बातचीत से इनकार भी किया है।

3. वामपंथी दल

द्रविड़ मुनेत्र कझगम गठबंधन का हिस्सा भाकपा, माकपा को इस चुनाव में दो-दो सीटें हासिल हुई हैं। यह दोनों ही दल टीवीके सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

क्या कहा है: टीवीके ने समर्थन जुटाने के लिए वामदलों से भी संपर्क किया है। माकपा के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने कहा है कि इस मामले पर पार्टी की राज्य समिति अपनी आगामी बैठक में निर्णय लेगी। वाम दलों ने इस पर विचार करने के लिए 8 मई तक का समय मांगा है। हालांकि, विजय के 7 मई तक ही शपथ लेने जा रहे हैं। 
 

4. वीसीके

द्रमुक गठबंधन में ही शामिल वीसीके के पास दो सीटें हैं। हालांकि, वह भी विजय की सरकार में शामिल होने पर दिलचस्पी दिखा चुकी है। 

क्या कहा है: वीसीके के अध्यक्ष थोल तिरुमावलवन ने फिलहाल अपना रुख साफ नहीं किया है और वे प्रतिबद्धता नहीं जता रहे हैं। उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है और चाहे अभी हो या भविष्य में, सभी बड़े फैसले कम्युनिस्ट पार्टियों के साथ मिलकर ही लिए जाएंगे।"

इन पार्टियों ने विजय को समर्थन देने से किया इनकार

विजय की टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कुछ पार्टियों ने स्पष्ट रूप से उन्हें समर्थन देने से इनकार किया है। इनमें द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की पार्टियां शामिल हैं। 

डीएमडीके: पार्टी की नेता प्रेमलता विजयकांत ने टीवीके को समर्थन देने का वादा करने से इनकार कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वे द्रमुक के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस' में ही बनी रहेंगी।

आईयूएमएल: पार्टी अध्यक्ष कादर मोहिदीन ने भी टीवीके का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया है और कहा है कि उनकी पार्टी द्रमुक गठबंधन के साथ ही काम करती रहेगी।

द्रमुक नेतृत्व और एनडीए गठबंधन को लेकर खुद विजय क्या बोले हैं?

विजय ने अपनी पार्टी टीवीके के गठन के बाद से द्रमुक, अन्नाद्रमुक और भाजपा को लेकर एक बहुत ही स्पष्ट और आक्रामक रुख अपनाते आए हैं। जहां द्रमुक को उन्होंने एक मौके पर अपना राजनीतिक दुश्मन बताया था, तो वहीं भाजपा को उन्होंने वैचारिक विपक्ष करार दिया था। इसके अलावा अन्नाद्रमुक पर भी विजय ने निशाना साधा था। 

1. द्रमुक पर क्या बोले हैं विजय?

विजय ने द्रमुक को अपना राजनीतिक दुश्मन करार दिया है। उन्होंने द्रमुक सरकार पर भ्रष्टाचार और खोखले प्रचार का आरोप लगाया है। खासकर शराब की दुकानों के खुलने (TASMAC) और कानून-व्यवस्था को लेकर उन्होंने स्टालिन सरकार का कड़ा विरोध किया।

इतना ही नहीं विजय ने द्रमुक पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि वे राज्य के संसाधनों पर कब्जा जमाए हुए हैं। इसके अलावा रैलियों में उन्होंने अक्सर पूछा है कि द्रमुक सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल क्यों रही है।

2. भाजपा पर क्या बोले हैं विजय?

विजय भाजपा को अपना वैचारिक दुश्मन मानते हैं। उन्होंने भाजपा की राजनीति को फासीवादी और सांप्रदायिक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीवीके धर्मनिरपेक्ष सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर चलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार की हिंदी थोपने और तीन-भाषा नीति का भी विरोध किया है और इसे तमिल पहचान पर हमला बताया है। हालांकि, इस मुद्दे को उन्होंने ज्यादा तूल नहीं दिया।

द्रमुक ने विजय पर कई मौकों पर भाजपा की बी-टीम होने का आरोप लगाया है। हालांकि, विजय ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके और भाजपा के बीच कोई भी समझौता न करने की नीति है।

3. अन्नाद्रमुक पर क्या बोले?

अन्नाद्रमुक को लेकर विजय का रुख आलोचना वाला रहा है। उन्होंने अन्नाद्रमुक की आलोचना की कि उन्होंने सत्ता के लिए भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी के साथ बेमेल गठबंधन किया और अपने आत्मसम्मान से समझौता किया।

इतना ही नहीं विजय ने अन्नाद्रमुक के मौजूदा नेतृत्व पर तंज कसते हुए उन्हें अपने सहयोगियों का गुलाम बताया और कहा कि वे एमजीआर और जयललिता की विरासत को सही से नहीं संभाल पा रहे हैं।

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