चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तहत दक्षिण 24 परगना जिले की 144-फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों (सहायक मतदान केंद्रों समेत) पर 21 मई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे के बीच नए सिरे से मतदान कराया जाएगा और मतों की गिनती 24 मई 2026 को होगी। चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इसे चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवालों से जोड़ रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल आयोग के निर्णय पर नजर बनाए हुए है।
29 अप्रैल को चुनाव के दौरान क्या हुआ?
आयोग ने यह निर्देश 29 अप्रैल 2026 को हुए मतदान के बाद जारी किए हैं। उस दिन बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर गंभीर चुनावी अपराध हुए थे। लोकतांत्रिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन किया गया था। आयोग ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है। निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह फैसला चुनावी शुचिता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। इससे मतदाताओं का विश्वास बहाल होने की उम्मीद है।
4 मई को सिर्फ 293 विधानसभा सीटों पर होगी मतगणना
आयोग के इस फैसले के बाद 4 मई को राज्य की 294 में से केवल 293 विधानसभा सीटों की मतगणना होगी। पहली बार ऐसा होगा जब एक विधानसभा सीट को अलग रखकर बाकी राज्य के चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। राजनीतिक हलकों में इसे बेहद असाधारण और 'नजीरविहीन' कदम माना जा रहा है। शुक्रवार को भी इन जगहों पर हुआ पुनर्मतदान
इससे पहले, एक मई को चुनाव आयोग ने घोषणा की थी कि, दो मई यानी शनिवार को राज्य के दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा की 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान होगा। इस कड़ी में इन 15 बूथों पर आज मतदान हुए, जिसमें शाम पांच बजे तक करीब 90.61 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। जबकि मगराहट पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में लगभग 89.29% और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्र में 91.77% मतदान दर्ज किया गया।
राज्य में विधानसभा चुनाव और बंपर वोटिंग
पश्चिम बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिए पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान हुआ था, जबकि दूसरे चरण के तहत 29 अप्रैल को 142 सीटें पर वोट डाले गए थे। विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। दोनों चरणों में राज्य में जमकर वोटिंग हुई है। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में 93.19 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी, वहीं दूसरे चरण में भी 92.67 फीसदी वोटिंग हुई थी। इसी के साथ बंगाल में वोटिंग का कुल औसत 92.93 फीसदी से ज्यादा पहुंच गया, जो कि देश में किसी राज्य में मतदान का नया रिकॉर्ड है। राष्ट्रीय स्तर पर इससे पहले सबसे अधिक मतदान 2013 में त्रिपुरा में हुआ था, जब मतदान प्रतिशत 91.82 प्रतिशत था।
मतगणना को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
राज्य में मतगणना से पहले सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को स्पष्ट कहा कि मतगणना केंद्रों पर किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि स्ट्रॉन्ग रूम की चौबीसों घंटे सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है।