संघर्ष भरा सफर, लेकिन हौसले रहे बुलंद
चांदनी का परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण है। उनके पिता कारपेंटर का काम करते हैं, जबकि मां स्कूल में साफ-सफाई का काम कर परिवार का सहारा बनती हैं। छोटी सी बस्ती में रहने वाली चांदनी ने सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। मेहनत ने बदली किस्मत
कठिन हालात, संसाधनों की कमी और संघर्षों के बीच चांदनी ने दिन-रात मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया। उनका यह रिजल्ट साबित करता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। अब सेना में अफसर बनने का सपना
स्टेट टॉपर बनने के बाद चांदनी ने कहा कि उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होकर लेफ्टिनेंट कर्नल बनना है। वे देश की सेवा करना चाहती हैं और अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती हैं। चांदनी विश्वकर्मा की सफलता न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनका संघर्ष और उपलब्धि उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बड़े सपने देखते हैं।
पहले से ही टॉपर बनने का था सपना
चांदनी विश्वकर्मा ने अपनी सफलता का राज बताते हुए कहा कि उन्होंने शुरू से ही टॉपर बनने का लक्ष्य तय कर लिया था और पहले दिन से ही उसी दिशा में मेहनत शुरू कर दी थी। वह रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ाई करती थीं और अपने टारगेट को लेकर बेहद अनुशासित रहीं।उन्होंने बताया कि कॉमर्स के साथ उनका मैथ्स भी था, लेकिन मैथ्स उनका थोड़ा कमजोर विषय था। इसी वजह से उन्होंने इस पर ज्यादा फोकस किया और अतिरिक्त मेहनत कर कमजोरी को ताकत में बदला। वहीं कॉमर्स स्ट्रीम में जहां ज्यादातर छात्र अकाउंट्स से डरते हैं, चांदनी के लिए वही सबसे पसंदीदा विषय रहा। अकाउंट्स में उनकी मजबूत पकड़ ने ही उन्हें टॉप तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई।