मतदाता सूची में गड़बड़ी, दिग्विजय सिंह पहुंचे चुनाव आयोग

       
 
      राजेंद्र पराशर 
 
1 मतदाता सूची में गड़बड़ी, दिग्विजय सिंह पहुंचे चुनाव आयोग
एक ही घर में मिले दर्जनों 37  मतदाता
भोपाल। मध्यप्रदेश में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी गड़बड़ियों का मुद्दा गरमाया हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह सोमवार को कई प्रभावित मतदाताओं के साथ मुख्य चुनाव पदाधिकारी के पास पहुँचे और मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर के आरोप लगाए।
शिकायत के दौरान भोपाल की नरेला विधानसभा के कई चौकाने वाले मामले सामने आए। करोंद की रतन कॉलोनी निवासी मोहन लाल साहू ने बताया कि उनके घर में पहले 65 फर्जी नाम जुड़े थे। शिकायत के बाद कुछ नाम तो हटे, लेकिन आज भी 37 अज्ञात लोगों के नाम’’ उनके पते पर दर्ज हैं। इसी तरह अनिल सिंह यादव ने शिकायत की कि उनके 4 सदस्यीय परिवार के घर में 45 नाम जुड़े हुए हैं। पूर्व इंजीनियर कमलेन्द्र कुमार गुप्ता ने भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके घर में 8 सदस्यों के अलावा 42 अनजान लोगों के नाम दर्ज हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना गृहस्वामी की सहमति के आरओ या एआरओ किसी का नाम कैसे जोड़ सकते हैं?
पूर्व नेवी चीफ को नोटिस
दिग्विजय सिंह ने भारतीय नौसेना के पूर्व चीफ एडमिरल अरुण प्रकाश के एक ट्वीट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तंज कसा। उन्होंने कहा 78 साल की उम्र में पूर्व नेवी चीफ और उनकी पत्नी को नाम शुद्धिकरण के लिए नोटिस दिया गया और उन्हें 18 किलोमीटर दूर बुलाया गया। यह एसआईआर की हकीकत है। सिंह ने दावा किया कि उनके पास इन गड़बड़ियों की विधिवत वीडियो रिकॉर्डिंग है, जिसे जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

2   राष्ट्रपति को भेजें आवेदन, वरना खो देंगे अपनी पहचान
आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर बोले उमंग सिंघार
भोपाल। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समुदाय की विशिष्ट पहचान को लेकर एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने देश भर के आदिवासियों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए अलग धर्म कोड की मांग को तेज करने की अपील की है। सिंघार ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आदिवासी समाज की पहचान किसी अन्य धर्म की श्रेणी में समाहित हो जाएगी।
सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से अपनी बात रखते हुए सिंघार ने कहा कि अब समय आ गया है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी भाई-बहन अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए जागें। हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली परंपराओं को बचाने के लिए अलग धर्म कोड अनिवार्य है। उन्होंने समुदाय से आग्रह किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आवेदन पत्र भरकर राष्ट्रपति महोदय तक अपनी आवाज पहुंचाएं। उन्होंने जोर दिया कि यदि फॉर्म नहीं भरे गए, तो जनगणना और अन्य सरकारी दस्तावेजों में आदिवासियों को किसी अन्य धर्म का हिस्सा मान लिया जाएगा, जिससे उनकी मौलिक पहचान को खतरा पैदा होगा।
वानर सेना वाले बयान पर फिर छिड़ी चर्चा
उमंग सिंघार का यह रुख उनकी पुरानी विचारधारा का ही विस्तार माना जा रहा है। इससे पहले भी वे आदिवासी अस्मिता पर मुखर रहे हैं। इसके पहले एक सम्मेलन में उन्होंने कहा था कि रामायण काल में भगवान राम की सहायता करने वाली वानर सेना वास्तव में आदिवासी समाज ही था। रामायण में जब राम जी की सेना की बात आई, तो आदिवासियों को वानर की संज्ञा दे दी गई। उन्होंने कहा था कि क्या जंगल में सिर्फ माता शबरी ही इकलौती आदिवासी थीं? नहीं, राम के साथ सेवा में लगे सभी लोग आदिवासी थे। यदि प्रभु राम ने विजय प्राप्त की, तो उसमें आदिवासियों का सबसे बड़ा योगदान था।

3  कूनो में ज्वाला ने दिया 5 शावकों को जन्म, देश में चीतों का संख्या 50 के पार
भोपाल। मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इस सुखद समाचार के साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या अब 53 हो गई है, जो प्रोजेक्ट चीता की सफलता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस खबर को साझा करते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने लिखा कूनो नेशनल पार्क से फिर खुशखबरी मिली है। चीता ज्वाला ने 5 शावकों को जन्म दिया है, जो प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या अर्धशतक के आंकड़े को पार करते हुए 53 तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ने एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें मादा चीता ज्वाला अपने नन्हे शावकों के साथ ममता भरे अंदाज में नजर आ रही है। उन्होंने इसे भारत में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों का एक मजबूत प्रमाण बताया।
केंद्रीय मंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि कूनो में बढ़ती चीतों की संख्या भारत की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन की दिशा में किए जा रहे कार्यों का प्रतीक है।
तीसरी बार मां बनी है माता चीता ज्वाला
नामीबिया से आई मादा चीता ज्वाला का यह तीसरा प्रसव है. सबसे पहले ज्वाला ने मार्च 2023 में 4 चीतों को जन्म दिया था। इसके बाद इसके बाद जनवरी 2024 में भी ज्वाला ने 4 शावकों को जन्म दिया। वहीं सोमवार यानि 9 मार्च  को ज्वाला ने 5 शावकों को जन्म दिया। मादा ज्वाला अब तक 13 शावकों को जन्म दे चुकी है, जिनमें भारत में जन्मी पहली चीता मादा शावक मुखी समेत अब 9 शावक जीवित हैं।

4   स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल
 अस्पतालों में चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्थाएं
भोपाल। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सोमवार से स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी असर देखने को मिला। लंबित स्टाइपेंड संशोधन और एरियर भुगतान की मांग को लेकर प्रदेश भर के रेजिडेंट और जूनियर डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। डॉक्टरों का आरोप है कि शासन द्वारा आदेश जारी होने के बावजूद अब तक बढ़ा हुआ स्टाइपेंड लागू नहीं किया गया है।
हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों की ओपीडी  सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के काम बंद करने के निर्णय के बाद अस्पतालों में नियमित सेवाएं न मिलने के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हर्निया, रॉड इम्प्लांट और अन्य सामान्य ऑपरेशन फिलहाल टाल दिए गए हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि केवल अति गंभीर मरीजों का ही ऑपरेशन थिएटर में इलाज किया जाएगा। जूनियर डॉक्टरों की नाराजगी का मुख्य कारण 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाला सीपीआई आधारित स्टाइपेंड संशोधन है। शासन के आदेशानुसार स्टाइपेंड में बढ़ोतरी अप्रैल 2025 से प्रभावी होनी थी। कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो बढ़ा हुआ मानदेय मिला है और न ही पिछला एरियर भुगतान किया गया है।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि जब तक स्टाइपेंड संशोधन का आदेश धरातल पर लागू नहीं होता, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। फिलहाल, प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में चिकित्सा व्यवस्था और अधिक प्रभावित होने की आशंका है।
डाक्टरों से निवेदन हड़ताल बंद कर काम पर जाए : राजेंद्र शुक्ल
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मेरी उनसे फ़ोन पर बात हुई है, उनकी समस्या का समाधान जल्द होगा। मेरी  जूनियर डाक्टरों से निवेदन है कि हड़ताल बंद कर काम पर जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने हड़ताल को लेकर आगे कहा कि मामला कोर्ट में है लिहाजा उस पर कुछ भी कहना ठीक नहीं है। इसके पहले हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को असंवैधानिक बता चुके है।

5   हाईकोर्ट का फैसला, विजयपुर उपचुनाव शून्य घोषित
कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता रद्द
भोपाल। विजयपुर विधानसभा सीट के सियासी समीकरणों में सोमवार को एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने विजयपुर उपचुनाव के नतीजों को शून्य घोषित करते हुए भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत को विजेता घोषित कर दिया है। इस फैसले के साथ ही वर्तमान विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी छिन गई है।
करीब 11 महीने पहले रामनिवास रावत ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल कर मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि  मुकेश मल्होत्रा ने नामांकन पत्र और चुनावी शपथ पत्र में गलत और अधूरी जानकारी दी। उन्होंने अपने विरुद्ध दर्ज अपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई। यह चुनाव आयोग की नियमावली का सीधा उल्लंघन है, जिससे चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने माना कि मुकेश मल्होत्रा नामांकन के दौरान जानकारी छिपाने के दोषी हैं। इसी आधार पर उनका निर्वाचन निरस्त कर दूसरे स्थान पर रहे रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट जाने की मोहलत
हालांकि, हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एक तकनीकी राहत भी दी है। यह आदेश अगले 15 दिनों तक प्रभावी नहीं होगा। इस अवधि का उद्देश्य मुकेश मल्होत्रा को फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय देना है। यदि 15 दिनों के भीतर ऊपरी अदालत से स्टे नहीं मिलता है, तो रावत आधिकारिक तौर पर विधायक पद की शपथ लेंगे।
फैसले का सम्मान, जाएंगे उच्च न्यायालय
विजयपुर विधानसभा मामले में हाईकोर्ट द्वारा कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का कार्यकाल शून्य घोषित किए जाने के बाद उन्होंने फैसले का सम्मान किया है, लेकिन कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और न्याय की गुहार लगाएंगे। उन्होंने कहा है कि वो देश के उच्चतम न्यायालय को दरवाजा खटखटाएंगे। 
6 मानदेय बढ़ाने  आशा-उषा कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन,
भोपाल। आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आज सोमवार को राजधानी में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि लंबे समय से वे स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मांग की कि 1 अप्रैल 2026 से उनके मानदेय में प्रतिवर्ष एक हजार रुपये की बढ़ोतरी की जाए तथा आशा-उषा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इसके साथ ही सभी कार्यकर्ताओं को 21 हजार रुपये का फिक्स मानदेय निर्धारित करने की मांग भी उठाई गई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में मिलने वाली प्रोत्साहन राशि टुकड़ों में दी जाती है, जिससे कई बार अधिकारियों के स्तर पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार की स्थिति बन जाती है। उन्होंने मांग की कि पूरी राशि का हिसाब लगाकर एकमुश्त भुगतान किया जाए और सभी को समान राशि दी जाए।  प्रदेश मीडिया प्रभारी संगीता यादव ने बताया कि आशा-उषा कार्यकर्ताओं के अधिकांश कार्य ऑनलाइन हो चुके हैं, इसलिए उनके स्व-प्रमाणित वाउचर को मान्य किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार से मांग है कि आशा-उषा कार्यकर्ताओं की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए और उनकी सभी मांगों को पूरा किया जाए।
7 प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना अंतर्गत पंजीयन में बैतूल दूसरे स्थान पर
भोपाल। प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना में 15 जनवरी से 8 मार्च तक आयोजित विशेष पंजीयन अभियान में श्रमिकों के पंजीयन में मध्यप्रदेश ने देश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। मध्यप्रदेश के बैतूल में सर्वाधिक 1771 पंजीयन हुए है। बैतूल जिला देश के जिलों में दूसरे स्थान पर तथा नर्मदापुरम जिला 1501 पंजीयन के साथ तीसरे स्थान पर रहा है।
असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले रेहड़ी-पटरी वाले, रिक्शा चालक, घरेलू कामगार आदि जिनकी आयु 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच है तथा मासिक आमदनी 15 हजार रूपये से कम है, उनके लिये केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना प्रारम्भ की गई है। योजना में पंजीकृत श्रमिक को 60 वर्ष की आयु के बाद प्रतिमाह 3 हजार रुपये निश्चित मासिक पेंशन दिये जाने का प्रावधान है। इस योजना में श्रमिक और सरकार द्वारा अंशदान दिया जाता है। अंशदान की राशि श्रमिक की आयु अनुसार 55 रूपये से 200 रुपये तक निर्धारित है। यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है तो पति/पत्नी को पेंशन का 50 प्रतिशत (1500 रूपये) दिये जाने के प्रावधान है। 
 

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