दिग्विजय बोले पीएम बताएं पाकिस्तान को फायदा क्यों पहुंचाया जा रहा है
भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रदेश के धान और बासमती चावल को जीआई टैग न मिलने के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रदेश के 27 लाख किसानों के हक की लड़ाई में वे पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ी तो दिल्ली में अनशन पर भी बैठेंगे।
राजधानी में अपने निवास पर आज मीडिया से चर्चा करते हुए दिग्विजय सिंह ने अंतरराष्ट्रीय बाजार का हवाला देते हुए कहा कि बासमती चावल के क्षेत्र में भारत का सीधा मुकाबला पाकिस्तान से है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पाकिस्तान का पलड़ा भारी है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में 40 से अधिक जिलों को बासमती के लिए जीआई टैग मिला हुआ है। हमारे यहां केवल 12 जिलों को ही यह मान्यता प्राप्त है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की कीमत सामान्य चावल से तीन गुना ज्यादा होती है, लेकिन एपिडा मध्यप्रदेश के धान को मान्यता नहीं दे रहा है, जिससे प्रदेश का किसान घाटे में है।
प्रधानमंत्री को लिख चुके हैं पत्र
सिंह ने सवाल उठाया कि उन्होंने 2025 में इस संबंध में प्रधानमंत्री मोदी को पत्र भी लिखा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने पूछा, “प्रधानमंत्री स्पष्ट करें कि आखिर भारतीय किसानों को नजरअंदाज कर पाकिस्तान को व्यापारिक लाभ क्यों होने दिया जा रहा है?
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी निशाने पर लिया। सिंह ने कहा, शिवराज सिंह 16 साल से अधिक समय तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और अब देश के कृषि मंत्री हैं। इसके बावजूद वे अपने ही राज्य के किसानों के हितों की रक्षा करने में विफल साबित हो रहे हैं। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री के साथ-साथ पीयूष गोयल की जिम्मेदारी भी तय की है। उन्होंने कहा कि यदि मध्य प्रदेश के किसानों को जल्द ही जीआई टैग नहीं दिया गया, तो मैं अनशन पर बैठूँगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल नहीं चाहता
अपने संन्यास और राज्यसभा के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं पर दिग्विजय सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वे अब राज्यसभा का तीसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते और इसके लिए पार्टी से अनुरोध भी कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे राजनीति से पूरी तरह रिटायर नहीं हो रहे हैं और पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे एक कार्यकर्ता की तरह निभाते रहेंगे।