श्रीकृष्ण पाथेय बनेगा आस्था का नया पथ

इंटरनेशनल ब्रांडिंग योजना, गुवाहाटी से केरल तक निकलेगी विशेष यात्रा
भोपाल।प्रदेश की पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण के चरण जहां-जहां पड़े, उन स्थानों को अब विश्व स्तरीय तीर्थ के रूप में नई पहचान मिलने जा रही है। प्रदेश सरकार ने श्रीकृष्ण पाथेय प्रोजेक्ट के जरिए द्वापर युग की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजने का संकल्प लिया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत न केवल मंदिरों का कायाकल्प होगा, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन का एक ऐसा अद्भुत संगम तैयार किया जाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों को भगवान कृष्ण के जीवन दर्शन से साक्षात्कार कराएगा।
प्रोजेक्ट का मुख्य केंद्र उज्जैन स्थित मुनि सांदीपनि आश्रम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गठित न्यास ने निर्णय लिया है कि उज्जैन को प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के केंद्र के रूप में पुनर्स्थापित किया जाएगा। यहां सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना की जाएगी, जहाँ लुप्त होती 64 कलाओं और 14 विद्याओं की विधिवत शिक्षा दी जाएगी। श्रीकृष्ण पाथेय’ की गूंज केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार ने असम के गुवाहाटी से लेकर केरल और कर्नाटक तक एक विशाल सांस्कृतिक यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। पूर्व से दक्षिण तक जुड़ेगा भारत प्रोजेक्ट की ब्रांडिंग के लिए सरकार ने एक विशाल यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। यह यात्रा असम के गुवाहाटी से शुरू होकर मणिपुर, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र होते हुए कर्नाटक और केरल तक जाएगी। इसका उद्देश्य देश भर के श्रद्धालुओं को मध्यप्रदेश में कृष्ण से जुड़े पर्यटन केंद्रों की ओर आकर्षित करना है।
श्रीकृष्ण मंदिरों का किया जाएगा जीर्णोद्धार
इसके साथ ही देश भर के 228 श्रीकृष्ण मंदिरों के जीर्णोद्धार का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। तात्कालिक कार्यों के लिए 12 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। साथ ही चिन्हित स्थानों पर श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित गैलरी, पुस्तकालय और संग्रहालय बनाए जाएंगे। सांदीपनि आश्रम (उज्जैन) के साथ-साथ नारायणा, जानापाव, अमझेरा और जामगढ़ की गुफाओं जैसे ऐतिहासिक स्थलों का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण किया जाएगा।
सभी जिलों के विद्वानों से मांगे जाएंगे सुझाव
इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने के लिए श्रीकृष्ण पाथेय न्यास ने प्रदेश के सभी 55 जिलों के तीन हजार विद्वानों को आमंत्रित किया है। ये विशेषज्ञ मंदिरों के बेहतर प्रबंधन, सांदीपनि गुरुकुल के स्वरूप और इन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर अपने शोधपरक सुझाव देंगे।
 

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