वल्लभ भवन की तर्ज पर जिला कार्यालयों की होगी मॉनिटरिंग
भोपाल। प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए सरकार अब सचिवालय मॉडल को जमीनी स्तर पर उतारने जा रही है। राजधानी के वल्लभ भवन, सतपुड़ा और विंध्याचल भवन में बायोमेट्रिक और उपस्थिति की कड़ाई के बाद, अब यही सख्त सिस्टम प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। शासन की मंशा साफ है जनता के काम में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में उपस्थिति अनिवार्य होगी। अब तक जिला स्तर पर उपस्थिति को लेकर लचीला रुख देखा जाता था, लेकिन अब मुख्यालय से इसकी डिजिटल या औचक निगरानी की जाएगी। अधिकारियों को न केवल समय पर दफ्तर पहुंचना होगा, बल्कि पूरे कार्यदिवस के दौरान अपनी सीट पर मौजूद रहना होगा। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज होने का सबसे बड़ा कारण मुख्यमंत्री का कड़ा रुख है। मुख्यमंत्री किसी भी समय, किसी भी जिले के उपस्थिति डेटा और लंबित फाइलों का ब्यौरा तलब कर सकते हैं। शासन के इस रुख को देखते हुए जिला स्तर पर प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग प्रमुखों ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि लापरवाही बरतने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
जनता की सहूलियत को प्राथमिकता
इस कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और गति लाना है। अक्सर देखा जाता है कि दूर-दराज से आने वाले ग्रामीण और आम नागरिक अधिकारियों के न मिलने के कारण परेशान होते हैं। सरकार का मानना है कि समयबद्ध उपस्थिति से फाइलों का निपटारा तेज होगा। आम जनता को अपने काम के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर प्रभावी होगा।