क्या अमेरिका की कमर तोड़ रहा ईरान?: कतर के बाद जॉर्डन में हजारों करोड़ का नुकसान; मिसाइल डिफेंस सिस्टम को झटका

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, अम्मान Published by: Pavan Updated Sat, 07 Mar 2026 08:08 PM IST

पश्चिम एशिया में संकट लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल की तरफ से की गई बमबारी से शुरू हुआ ये सिलसिला बीते एक हफ्ते से जारी है। ईरान अपने ड्रोन और मिसाइल की मदद से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने जॉर्डन में 300 मिलियन डॉलर की अमेरिकी मिसाइल डिफेंस प्रणाली को तबाह कर दिया है। जानिए क्या है पूरा मामला

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ईरान ने अमेरिका के थाड सिस्टम को किया तबाह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव को देखते हुए सवाल ये उठ रहा है कि क्या ईरान पश्चिम एशिया में सैन्य ठिकानों पर हमले करके अमेरिका की कमर तोड़ रहा है? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि बीते सात दिनों के टकराव में ईरान ने अमेरिका को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। युद्ध की विभीषिका में एक तरफ अब तक 1400 से अधिक लोगों ने जान गंवाई है, तो दूसरी तरफ ईरान ने कतर और जॉर्डन जैसे पश्चिमी एशियाई देशों में हजारों करोड़ की लागत से बनाई गई अमेरिकी प्रणाली को नेस्तनाबूद कर दिया है। 
अमेरिका को 22 हजार करोड़ का नुकसान?
ईरान के हमलों से जुड़ी रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले के जवाब में किए गए पलटवार की सबसे ताजा घटना जॉर्डन में की गई स्ट्राइक है, जहां थाड रडार सिस्टम को नष्ट करने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक थाड रडार सिस्टम की लागत करीब 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 22 हजार करोड़ रुपये है। इस संबंध में आई खबरों के मुताबिक ईरान की तरफ से जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी हवाई अड्डे पर हमला किया गया। इस स्ट्राइक में अमेरिका की हजारों करोड़ की प्रणाली नष्ट हो गई।                                                                                                                                                                                                              मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर हमला
जानकारी के मुताबिक, ईरान के हमले से जॉर्डन के मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर संयुक्त राज्य अमेरिका का बहु-करोड़ रडार सिस्टम नष्ट हो गया। आरटीएक्स कॉर्प का एएन/टीपीवाई-2 रडार और सहायक उपकरण अमेरिकी थाड मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण है। यह अमेरिकी मिसाइल रक्षा बैटरियों को निर्देशित करने में अहम भूमिका निभाता है। अमेरिकी टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (थाड) सिस्टम को वायुमंडल के किनारे पर बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह कम दूरी की पैट्रियट मिसाइल सिस्टम बैटरियों की तुलना में अधिक जटिल खतरों को रोक सकता है। एएन/टीपीवाई-2 रडार के कथित तौर पर निष्क्रिय होने से अवरोधन का कार्य पैट्रियट बैटरियों पर चला जाएगा। पैट्रियट बैटरियों में पीएसी-3 इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक पहले से ही सीमित है।

थाड सिस्टम की वैश्विक तैनाती और लागत
संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया भर में आठ थाड सिस्टम संचालित करता है। इनमें दक्षिण कोरिया और गुआम में तैनाती भी शामिल है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, प्रत्येक बैटरी की लागत लगभग 1 अरब रुपये है। अकेले रडार की लागत लगभग 3000 लाख रुपये है। थिंक टैंक के टॉम कराको ने कहा कि ये दुर्लभ रणनीतिक संसाधन हैं। इनका नुकसान एक बड़ा झटका है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सेना की आठ-बैटरी थाड फोर्स 2012 में निर्धारित नौ-बैटरी की आवश्यकता से कम है। इससे बहुत कम अतिरिक्त क्षमता बचती है।
अन्य रडार सिस्टम को नुकसान
इस युद्ध में पहले, कतर में एक एएन/एफपीएस-132 रडार भी ईरानी हमले के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। यह सिस्टम एक प्रारंभिक चेतावनी रडार के रूप में कार्य करता है। यह अत्यधिक दूरी पर खतरों का पता लगाने में सक्षम है। हालांकि, इसमें इंटरसेप्टर को निर्देशित करने के लिए आवश्यक सटीकता की कमी है।
खाड़ी क्षेत्र में रक्षा नेटवर्क पर दबाव
खाड़ी क्षेत्र में हवाई और मिसाइल रक्षा नेटवर्क पर ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की लहरों से भारी दबाव पड़ा है। इससे चिंताएं बढ़ गई हैं कि थाड और पीएसी-3 जैसे उन्नत इंटरसेप्टर का स्टॉक जल्द ही खतरनाक रूप से कम हो सकता है। पेंटागन हथियारों के उत्पादन में तेजी लाने पर जोर दे रहा है। 
थाड और पैट्रियट की क्षमताएं
थाड सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को वायुमंडल के ऊपरी किनारे पर ही नष्ट करने के लिए बनाया गया है। यह इसे छोटी दूरी की पैट्रियट मिसाइल प्रणालियों की तुलना में अधिक जटिल खतरों को रोकने में सक्षम बनाता है। पैट्रियट बैटरियां पीएसी-3 इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग करती हैं। इन मिसाइलों का स्टॉक वर्तमान में सीमित है। एएन/टीपीवाई-2 रडार की अनुपलब्धता से पैट्रियट बैटरियों पर अधिक भार पड़ेगा। यह स्थिति अमेरिकी मिसाइल रक्षा क्षमताओं के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नुकसान से अमेरिकी रक्षा रणनीति पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

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