India-US Deal: 'भारत से व्यापार में चीन वाली गलती नहीं दोहराएगा अमेरिका', क्यों बोले अमेरिकी उप विदेश मंत्री

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Fri, 06 Mar 2026 07:04 PM IST

अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने रायसीना संवाद में 'अमेरिका प्रथम' नीति पर बात करते हुए एक बात कही। जिसे भारत के नजरिए से पशोपेश में डालने वाला कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार में चीन वाली गलतियां नहीं दोहराएगा। हालांकि उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापार में पारस्परिक लाभ पर जोर दिया जाएगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

US Official reveals America First policy says Will Not Repeat China Mistake With India
अमेरिका के उप विदेश मंत्री - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने नई दिल्ली में आयोजित रायसीना संवाद में अमेरिका फर्स्ट नीति पर विस्तार से बात की। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक संबंधों में चीन के साथ की गई पिछली गलतियों को नहीं दोहराएगा। यह नीति अमेरिकी आर्थिक हितों को घरेलू और विदेश नीति दोनों में प्राथमिकता देती है।

लैंडौ ने फरवरी 2026 के अमेरिका-भारत अंतरिम शुल्क ढांचे का उल्लेख किया, जिसके तहत 50 फीसदी शुल्क को घटाकर 18 फीसदी किया गया था। उन्होंने संकेत दिया कि यह समझौता अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए 'अमेरिका प्रथम' दृष्टिकोण से बातचीत के बाद हुआ था। अमेरिका ने चीन को विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने का समर्थन करके सबक सीखा है, यह मानते हुए कि इससे अमेरिकी कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, चीन ने बाद में कई वाणिज्यिक मामलों में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया।
 
लैंडौ ने कहा, "भारत को समझना चाहिए, हम चीन के साथ हुई 20 साल पहले की गलतियां नहीं दोहराएंगे।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'अमेरिका प्रथम' का अर्थ अलगाववादी दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि यह अन्य देशों के साथ सहयोग के माध्यम से उद्देश्यों को प्राप्त करने में विश्वास रखता है। अमेरिका भारत के उदय को महत्वपूर्ण मानता है और पारस्परिक लाभ पर जोर देता है।

चीन से सीखे गए सबक पर क्या बोले अमेरिकी उप विदेश मंत्री?

अमेरिका ने चीन को विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने का समर्थन किया था। उस समय अमेरिका का मानना था कि इससे उसे विशाल बाजार और कुशल आपूर्ति शृंखलाओं तक पहुंच मिलेगी। हालांकि, चीन ने बाद में कई वाणिज्यिक क्षेत्रों में अमेरिका को चुनौती दी और उसे पीछे छोड़ दिया। इसी अनुभव के आधार पर अमेरिका अब भारत के साथ व्यापार में अधिक सतर्कता बरत रहा है। वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके लोगों के लिए व्यापारिक संबंध निष्पक्ष हों।

लैंडौ की नजर में अमेरिका फर्स्ट का क्या मतलब?

लैंडौ ने स्पष्ट किया कि 'अमेरिका प्रथम' का मतलब अमेरिका अकेला नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्देश्यों को प्राप्त करने का एक तरीका अन्य देशों के साथ सहयोग करना है। ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिका फिर से महान बने, और वे भारत के प्रधानमंत्री या अन्य विश्व नेताओं से भी यही उम्मीद करते हैं कि वे अपने देशों को महान बनाना चाहेंगे। यह नीति पारस्परिक राष्ट्रवाद का एक रूप है, जो परोपकारिता के बजाय पारस्परिक लाभ पर केंद्रित है।


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