ग्लोबल साउथ में अपनी तरह का पहला और सबसे बड़ा आयोजन इंडिया एआई समिट 2026 नई दिल्ली में जारी है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से विशेष बातचीत की। इस दौरान उन्होंने भारत की एआई रणनीति, भविष्य की योजनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने साफ किया है कि भारत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का जरिया है। आइए जानते हैं पीएम ने बातचीत के दौरान क्या कुछ कहा है?

सवाल: एआई के दुरुपयोग और सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं हैं। भारतीयों को एआई के संभावित नुकसान से बचाने के लिए हम क्या कर रहे हैं?
जवाब: प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि तकनीक केवल मानवीय इरादों के लिए एक फोर्स-मल्टीप्लायर है और निर्णय लेने की अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसानों की होनी चाहिए। भारत ने एआई विनियमन में एक संरचित दृष्टिकोण अपनाया है। जनवरी 2025 में एआई सेफ्टी इंस्टीच्यूट लॉन्च किया गया, जो एआई सिस्टम की नैतिक और सुरक्षित तैनाती को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित तंत्र है। भारत का जोखिम मूल्यांकन ढांचा स्थानीय खतरों पर केंद्रित है, जिसमें महिलाओं को निशाना बनाने वाले डीपफेक और बाल सुरक्षा जोखिम शामिल हैं। सरकार ने एआई-जनित सामग्री की वाटरमार्किंग और हानिकारक सिंथेटिक मीडिया को हटाने के लिए नियम अधिसूचित किए हैं। साथ ही, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट डेटा सुरक्षा को मजबूत करता है।
सवाल: युवाओं के एक वर्ग में डर है कि एआई उनकी नौकरियां छीन लेगा। सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?
जवाब: पीएम मोदी ने कहा कि वह युवाओं की चिंता को समझते हैं, लेकिन डर का सबसे अच्छा इलाज तैयारी है। सरकार इसे भविष्य की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि वर्तमान की जरूरत के रूप में देख रही है और दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी स्किलिंग पहलों में निवेश कर रही है। वह एआई को एक 'फोर्स-मल्टीप्लायर' के रूप में देखते हैं जो डॉक्टरों, शिक्षकों और वकीलों की क्षमता को बढ़ाएगा ताकि वे अधिक लोगों की मदद कर सकें। इतिहास गवाह है कि तकनीक के कारण काम गायब नहीं होता, बल्कि उसका स्वरूप बदल जाता है और नई तरह की नौकरियां पैदा होती हैं। स्टैनफोर्ड ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में भारत तीसरे स्थान पर है, जो एआई आरएंडडी और टैलेंट में हमारी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। सही कौशल के साथ, भारतीय युवा एआई युग में काम के भविष्य का नेतृत्व करेंगे।
सवाल: 4G और 5G की तरह एआई में आत्मनिर्भर भारत के लिए आपका विजन क्या है?
जवाब: प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मूल सिद्धांत यह है कि भारत को केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता होना चाहिए। एआई में उनका विजन तीन स्तंभों पर टिका है- संप्रभुता, समावेशिता और नवाचार। उनका लक्ष्य है कि भारत एआई के उपभोग में ही नहीं, बल्कि निर्माण में भी दुनिया की शीर्ष तीन एआई महाशक्तियों में शामिल हो। हमारे एआई मॉडल दुनिया भर में तैनात होंगे और अरबों लोगों को उनकी मूल भाषाओं में सेवा देंगे। भारतीय एआई स्टार्टअप्स का वैल्यूएशन सैकड़ों अरबों में होगा और वे लाखों उच्च-गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करेंगे। एआई में आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि डिजिटल सदी के लिए भारत अपना कोड खुद लिखेगा और इंडिया एआई मिशन के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह कोड हमारे मूल्यों को साझा करे।