अपात्र कॉलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग पर मॉड्यूल बनाएंगे, हाईकोर्ट के निर्देश, कहा-दोनों पक्ष प्रस्ताव और आपत्तियां साझा कर समन्वय बनाएं

जबलपुर. नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन में हुए फर्जीवाड़े से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की युगल पीठ ने अपात्र नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों के स्थानांतरण और प्रशिक्षण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन और मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल को आपस में समन्वय बनाकर नया और संशोधित शिफ्टिंग मॉड्यूल तैयार करने को कहा है. इसे अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा. सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने अपात्र कॉलेजों के छात्रों के स्थानांतरण और डबल शिफ्ट में प्रशिक्षण के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट और शिफ्टिंग मॉड्यूल पेश किया. इस पर याचिकाकर्ता लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट विशाल बघेल ने आपत्तियां दर्ज कराईं. याचिकाकर्ताओं ने मॉड्यूल में प्रशिक्षण की पारदर्शिता, छात्रों की पसंद, बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षण की लागत जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए.

उन्होंने मांग की कि छात्रों की आगे की पढ़ाई का खर्च अपात्र कॉलेजों की बैंक गारंटी राजसात कर वसूला जाए. साथ ही, शिफ्टिंग की पूरी प्रक्रिया छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखकर तय की जाए. छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने दोनों पक्षों को एक-दूसरे के प्रस्ताव और आपत्तियां साझा करने तथा समन्वय से संशोधित मॉड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए. कोर्ट ने प्रक्रिया में पारदर्शिता, छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लिनिकल ट्रेनिंग बनाए रखने पर जोर दिया. साथ ही, दोषी संस्थानों की जवाबदेही तय करने की जरूरत भी रेखांकित की. मामले में नर्सिंग काउंसिल की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पैरवी की. मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी.


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