कांग्रेस ने कहा ओबीसी महिलाओं के साथ अन्याय
भोपाल। मध्यप्रदेश में नारी शक्ति वंदन अभियान को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार के इस अभियान की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे महिलाओं के सशक्तिकरण के बजाय नारी के नाम पर राजनीतिक प्रबंधन करार दिया है।
सिंघार ने भाजपा के दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण कोई नई पहल नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1992-93 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से इसकी मजबूत नींव रखी थी। इसी का परिणाम है कि आज देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं पंचायत और नगर निकायों में निर्वाचित हैं। वर्तमान में इन निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। सिंघार ने आरक्षण की रूपरेखा में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की उपेक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पूछा कि इस व्यवस्था में एससी और एसीटी महिलाओं के लिए तो प्रावधान है, लेकिन ओबीसी महिलाओं के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखती। क्या इतनी बड़ी आबादी को इस अधिकार से बाहर रखना सामाजिक न्याय है?
2028 चुनाव और परिसीमन का पेंच
नेता प्रतिपक्ष ने आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि परिसीमन की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं है, ऐसे में क्या मध्यप्रदेश की महिलाओं को 2028 के विधानसभा चुनाव में इसका लाभ मिल पाएगा , सरकार 2027 की जातिगत जनगणना के परिणामों का इंतजार क्यों नहीं करना चाहती, बिना वास्तविक सामाजिक और जातिगत आंकड़ों के लिया गया निर्णय न्यायसंगत नहीं है। क्या भाजपा ओबीसी वर्ग की वास्तविक हिस्सेदारी को छिपाने का प्रयास कर रही है?