बचपन पीरमुहानी इलाके में बीता, पढ़ाई कहां हुई?
नितिन नवीन भाजपा के बड़े नेताओं से एक और जेपी आंदोलन से राजनीति की शुरुआत करने वाले दिवंगत नवीन सिन्हा के बेटे हैं। 23 मई 1980 पटना में नितिन नवीन का जन्म हुआ है। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नवीन का बचपन पीरमुहानी और लोहानीपुर इलाके में बीता। उनके पिता दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा इधर ही रहते थे। हालांकि विधायक आवास मिलने के बाद से लंबे समय तक मिलर स्कूल के आसपास का आशियाना रहा। नितिन की शुरुआती पढ़ाई बिहार के सबसे प्रतिष्ठित प्राइवेट स्कूल- संत माइकल हाई स्कूल से हुई थी। यहीं से 1996 में 10वीं की सीबीएसई परीक्षा पास करने के बाद वह दिल्ली में 12वीं करने गए। 1998 में 12वीं करने के बाद वह मूल धारा की स्नातक से अलग पढ़ाई करने के लिए प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे थे।
पिता मंत्री बनते-बनते रह गए, बेटे तीन बार मंत्री बने
2005 में पिता नवीन किशोर सिन्हा भाजपा विधायक के रूप में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार के उप मुख्यमंत्री नहीं तो मंत्री जरूर बनते, लेकिन इससे पहले दिल्ली से उनकी मौत की खबर आई। इससे नितिन की पढ़ाई-तैयारी जहां की तहां रह गई। अगले साल उनकी सीट पर उप चुनाव हुआ तो नितिन विधायक बने। विधायक के रूप में नितिन नवीन पटना पश्चिमी क्षेत्र (अब, बांकीपुर विधानसभा) की पहचान बने। उप चुनाव में जीते और फिर हमेशा बड़े अंतर से जीतते ही रहे। केंद्र में भी जब भाजपा की सरकार बन गई तो नितिन नवीन का राजनीतिक रूप बढ़ा। विजन की स्पष्टता और कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ को समझते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। यह चीज नितिन नवीन के लिए फायदेमंद साबित हुआ
2016 से 2019 तक भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा करना नितिन नवीन के लिए फायदेमंद साबित हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में पहचान बनी तो दूसरे राज्य की तरफ भी भाजपा ने उन्हें भेजा। 2019 में सिक्कम का संगठन प्रभारी के रूप में और फिर जुलाई 2024 से छत्तीसगढ़ में नितिन नवीन ने संगठन के लिए जो काम किया और जैसी सक्रियता दिखाई, उसे स्वीकारने का प्रमाण है यह ताजा फैसला। छत्तीसगढ़ प्रभारी के रूप में वह भाजपा के लिए पुनर्वापसी का मंत्र साबित हुए। बिहार सरकार में नितिन नवीन कुल पांच बार विधायक बने और तीन बार मंत्री बने। आखिरी बार 2025 विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मंत्री बने लेकिन कुछ ही वक्त बाद उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई। इसलिए उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अब वह 20 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित होंगे।
नितिन नवीन के परिवार के बारे में भी जानिए
2005 में पटना पश्चिम सीट से विधायक रहे 55 साल के नवीन सिन्हा का निधन दिल्ली में हो गया था। उस वक्त नितिन महज 26 साल के थे। भाजपा ने नितिन नवीन को अपने पिता की विरासत संभालेंगे के लिए कहा। लेकिन, शुरू में नितिन नहीं मानें। उनकी मां मीरा सिन्हा ने उन्हें समझाया तो वह मान गए। नितिन चुनावी मैदान में पटना पश्चिम उतरे। उपचुनाव में वह पहली बार जीते। इसके बाद से जो जीत का सिलसिला शुरू हुआ, वह जारी है। नितिन नवीन की मीरा सिन्हा ने उनकी शादी दीपमाला श्रीवास्तव से करवाई। दीपमाला बैंक अधिकारी थीं। अब वह नौकरी छोड़ अपना स्टार्टअप नविरा इंटरप्राइजेज को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटी हैं। नविरा इनकी बेटी का नाम है। नवीन-नितिन के बाद अगली पीढ़ी में एक लड़का है- नैतिक। इसके बाद हैं नित्या नविरा। यही छोटा-सा परिवार है नितिन का अब।
नाम नितिन नवीन, लेकिन अंग्रेजी में Nitin Nabin क्यों चलता है?
चुनाव आयोग के शपथ पत्र में भी वह अपना नाम हिंदी में नितिन नवीन लिखते हैं। हस्ताक्षर में भी स्पष्ट तौर पर हिंदी का ही नाम नितिन नवीन दिखता है। अंग्रेजी में हर जगह Nitin Nabin लिखा गया है। हर सोशल मीडिया खाते से लेकर ईमेल आईडी तक में यही लिखा है। इसलिए, अंग्रेजी में नितिन नबीन और हिंदी में वह नितिन नवीन हैं। पिता के नाम के हिसाब से उन्हें नितिन नवीन ही कहा जाता है। उनके पिता को देसज में लोग नबीन बाबू कहते थे, इसलिए नितिन को भी कई लोग नितिन नबीन कह देते हैं, हालांकि उनका नाम नितिन नवीन ही प्रचलित है। कुछ दिन पहले ही नेहरू-गांधी परिवार पर बड़ा बयान दिया था
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सात दिन पहले ही नेहरू-गांधी परिवार पर हमला बोला था। उन्होंने उन्होंने इसे ‘समझौता मिशन’ की राजनीति बताते हुए आरोप लगाया कि परिवार के हितों को देशहित से ऊपर रखा गया। नवीन ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में बिना किसी प्रतिफल के तिब्बत में भारत के अधिकार चीन को सौंप दिए। उन्होंने कहा कि नेहरू ने कभी 45 करोड़ भारतीयों को अपनी ‘जिम्मेदारी’ बताया था, लेकिन उनके फैसलों ने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाया। भाजपा अध्यक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय रक्षा सौदों का इस्तेमाल निजी हितों के लिए किया गया। उन्होंने दावा किया कि रक्षा सेवाओं के माध्यम से निजी बैंक खातों को भरने का काम हुआ।