बढ़ता मानव-वन्य जीव संघर्ष, 5 सालों में बेहाल हुए ग्रामीण और पशुपालक

सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ा रहा मानव-वन्य जीव संघर्श
भोपाल।  प्रदेश में जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच की ’लक्ष्मण रेखा’ धुंधली होती जा रही है। जंगल से सटे गांवों और कस्बों में जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही अब सीधे इंसानी जीवन और पशुधन के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वन विभाग के चौंकाने वाले ताजा आंकड़े इस बढ़ती त्रासदी की गवाही दे रहे हैं, जहाँ संघर्ष न केवल जान-माल का नुकसान बढ़ा रहा है, बल्कि सरकारी खजाने पर मुआवजे का बोझ भी लगातार भारी होता जा रहा है।
आंकड़े बताते हैं कि बीते 5 सालों में पालतू पशुओं के शिकार की घटनाओं में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां वर्ष 2019-20 में जंगली जानवरों के हमलों में 9,760 पशु मारे गए थे, वहीं 2024-25 तक यह संख्या बढ़कर 15,259 तक पहुंच गई है। पालतू पशुओं की सुरक्षा अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
जनहानि और मुआवजे का बढ़ता बोझ
जंगली जानवरों का हमला केवल पशुधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह इंसानी जानों पर भी भारी पड़ रहा है। वर्ष 2024-25 में जंगली जानवरों के हमलों में 71 लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही 896 लोग घायल हुए, जिन्हें सरकार द्वारा लाखों की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। पिछले कुछ वर्षों में मुआवजे की राशि में हुई वृद्धि विभाग के बढ़ते वित्तीय तनाव को दर्शाती है।
साल-दर-साल घायलों को वितरित किया मुआवजा
2019-20 में 1,190 घायल हुए लोगों को 87,36,774 मुआवजा दिया। 2020-21 में 1,273 लोगों को  95,50,946 मुआवजा दिया।  2021-22 में 1,003 लोगों को  93,54,937 मुबावजा वितरित किया। 2022-23 में   1,320  लोगों को 1,24,64,921 मुआवजा वितरित किया।  2023-24 में  1,232 लोगों को  1,32,77,572 मुआवजा दिया गया। इसी तरह 2024-25 में  896  लोगों को 1,33,99,690 मुआवजा वितरित किया गया।

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