
क्रिकेट सिर्फ रन और रिकॉर्ड का खेल नहीं होता, यह इंतजार, संघर्ष और आत्मविश्वास की परीक्षा भी होता है। संजू सैमसन की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। टी20 विश्वकप से ठीक पहले प्लेइंग-11 से बाहर होना, न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में बल्ला नहीं चलने पर आलोचनाओं का सामना करना, ये सब किसी भी खिलाड़ी का मनोबल तोड़ सकते थे, लेकिन संजू ने हार नहीं मानी। उन्होंने चुपचाप अपने खेल पर काम किया, धैर्य रखा और सही मौके का इंतजार किया।
टी20 विश्वकप के दौरान जब बाकी भारतीय बल्लेबाज फेल हुए तो आवाज उठी एक नाम को मौका देने की- वह नाम है संजू सैमसन। संजू को जब दोबारा मौका मिला तो उन्होंने बल्ले से ऐसा जवाब दिया कि आलोचक भी तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। उनकी वापसी सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, संयम और साहस की जीत है। संजू सैमसन ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो हर ठोकर सिर्फ आगे बढ़ने की ताकत देती है।




'कोहली-रोहित जैसे महान खिलाड़ियों को देखा'
सैमसन ने कहा, 'मैं काफी लंबे समय से यह फॉर्मेट खेल रहा हूं। करीब 10-12 साल आईपीएल खेला है और पिछले 10 साल से देश के साथ जुड़ा हूं। भले ही हर मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन डगआउट से बैठकर मैंने बहुत कुछ सीखा। विराट कोहली, रोहित शर्मा जैसे महान खिलाड़ियों को करीब से देखा। यह बहुत जरूरी होता है कि आप देखें, समझें और सीखें कि वे मैच को कैसे खत्म करते हैं और परिस्थितियों के अनुसार अपने खेल को कैसे बदलते हैं।'
'करीब 100 मैचों को करीब से देखा है'
सैमसन ने कहा, 'मैंने भले ही 50-60 मैच खेले हों, लेकिन करीब 100 मैचों को करीब से देखा है। इस अनुभव ने मुझे बहुत मदद की। पिछले मैच में हम पहले बल्लेबाजी कर रहे थे, तो लक्ष्य था बड़ा स्कोर खड़ा करना, इसलिए मैंने पहली गेंद से ही बड़ा खेलने की सोची। लेकिन आज का मैच अलग था। जैसे ही मैं तेजी से खेलने की सोचता, विकेट गिर जाते। तब मैंने साझेदारी बनाने पर ध्यान दिया और अपनी प्रक्रिया पर फोकस रखा। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कुछ खास कर जाऊंगा, बस अपनी भूमिका निभाने और एक-एक गेंद पर ध्यान देने की कोशिश की।'
सैमसन ने कहा, 'यह मेरी जिंदगी के सबसे बेहतरीन दिनों में से एक है। फैंस हमेशा ऊर्जा और समर्थन देते हैं, लेकिन दूसरी तरफ मन में एक सवाल भी आता है कि अगर आज नहीं चला तो? यह विचार आता जरूर है, लेकिन जब भी ऐसा हुआ, मैंने खुद को वर्तमान में लाया, सिर्फ गेंद को देखा और उसी के अनुसार खेलने पर भरोसा किया। आज वह तरीका काम कर गया।'